जैसलमेर बस हादसा
जयपुर, 15 अक्टूबर 2025 — राजस्थान के जैसलमेर जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। बुधवार सुबह एक निजी एसी बस में भीषण आग लगने से 20 यात्रियों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हादसा एसी गैस लीक होने से हुए शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ। हादसे के समय बस का इमरजेंसी गेट लॉक था, जिसके चलते यात्री बाहर नहीं निकल सके और अंदर ही फंस गए।
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सूत्रों के अनुसार, बस जैसलमेर से जोधपुर की ओर जा रही थी। डिग्गी क्षेत्र में अचानक बस के पिछले हिस्से से धुआं निकलने लगा। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। बस के अंदर कुल 40 यात्री सवार थे। तेज़ी से बढ़ती आग के कारण लोगों में चीख-पुकार मच गई, लेकिन इमरजेंसी गेट लॉक होने से किसी को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही मिनटों में बस का पूरा ढांचा जलकर राख हो गया। सड़क किनारे लोगों ने मदद करने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें बहुत तेज़ थीं।जैसलमेर बस हादसा

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🧯 आग लगने का कारण
जांच में प्रारंभिक जानकारी मिली है कि बस के एसी सिस्टम में गैस लीक हो रही थी। गैस लीक से शॉर्ट सर्किट हुआ और वहीं से आग फैल गई। बस के अंदर सुरक्षा उपकरण (जैसे अग्निशमन सिलेंडर या इमरजेंसी हैमर) मौजूद नहीं थे। अगर ये बेसिक सुरक्षा इंतज़ाम होते तो शायद कई जिंदगियाँ बचाई जा सकती थीं।जैसलमेर बस हादसा
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🚒 राहत और बचाव कार्य
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने में लगभग 45 मिनट लग गए। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में मदद की। हादसे के बाद घायल यात्रियों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जोधपुर से आई मेडिकल टीम ने घटनास्थल पर शवों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक 20 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें एक ही परिवार के 5 सदस्य शामिल हैं।जैसलमेर बस हादसा
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😢 मृतकों की पहचान और परिजनों का हाल
मृतकों की पहचान का काम जारी है। कई शव इतने झुलस गए हैं कि डीएनए टेस्ट के ज़रिए पहचान करनी पड़ेगी। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अस्पतालों और पोस्टमार्टम सेंटरों पर भारी भीड़ लगी हुई है। प्रशासन ने परिजनों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
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🏛️ सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ने इस हादसे पर गहरा शोक जताया है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
ट्रांसपोर्ट विभाग ने बस कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही सभी निजी बस ऑपरेटरों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी गाड़ियों में एसी सिस्टम, वायरिंग और सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच कराएं।
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सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमारी लंबी दूरी की बस यात्राएं सुरक्षित हैं?
भारत में हर साल सैकड़ों लोग ऐसे हादसों का शिकार होते हैं, जिनमें छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी त्रासदी में बदल जाती हैं —
इमरजेंसी गेट बंद रखना
बसों में आग बुझाने वाले उपकरण न होना
ड्राइवरों का तकनीकी प्रशिक्षण न होना
पुरानी वायरिंग और ओवरलोडिंग
ऐसे में यह ज़रूरी है कि सरकार कड़े सुरक्षा नियम लागू करे और आम यात्री भी जागरूक रहें।
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निष्कर्ष
जैसलमेर बस हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यदि बस मालिक और प्रशासन सुरक्षा को प्राथमिकता दें, तो ऐसी त्रासदियाँ रोकी जा सकती हैं। 20 परिवारों की यह पीड़ा पूरे देश को यह संदेश देती है कि लापरवाही की कीमत हमेशा किसी की जान से चुकानी पड़ती है।